मिले कैसे ये तो एक बहाने की तरह है
होगा आगे क्या ये तो अक्सर हो जाने की तरह है
कोई न सफर में तो साथ अच्छे का ही है
फर्क इतना है की कोई दिल्ली से तो कोई अलवर से है
लेकर तो साथ ही जाने का सोचा है
बस अभी तो इंतज़ार की घडी है
सोचते है कि काश ये भी अच्छे से ही कट जाये
ताकि जो कुछ ख़ास है वो साथ ही हो जाये
ट्रैन की ये मंज़िल होनी तो साथ ही चाहिए
निकले जब अकेले घर से तो थामने वाला तो कोई चाहिए
फर्क तो तब पड़े जब वो सामने ही होना चाहिए
मौका वो भी आएगा जब जो सोचा है हो जायेगा
सोचा हुआ ख्वाब अपने आप ही ज़िन्दगी में उतर आएगा !!
होगा आगे क्या ये तो अक्सर हो जाने की तरह है
कोई न सफर में तो साथ अच्छे का ही है
फर्क इतना है की कोई दिल्ली से तो कोई अलवर से है
लेकर तो साथ ही जाने का सोचा है
बस अभी तो इंतज़ार की घडी है
सोचते है कि काश ये भी अच्छे से ही कट जाये
ताकि जो कुछ ख़ास है वो साथ ही हो जाये
ट्रैन की ये मंज़िल होनी तो साथ ही चाहिए
निकले जब अकेले घर से तो थामने वाला तो कोई चाहिए
फर्क तो तब पड़े जब वो सामने ही होना चाहिए
मौका वो भी आएगा जब जो सोचा है हो जायेगा
सोचा हुआ ख्वाब अपने आप ही ज़िन्दगी में उतर आएगा !!